हरिशंकर परसाई के व्यंग्य में यथार्थबोध

300.00

प्रस्तुत पुस्तक ज्ञानरंजन द्वारा संपादित हरिशंकर परसाई की प्रतिनिधि रचनाओं का संचयन ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ व्यंग्य-संग्रह पर आधारित है। भारत की आजादी के बाद मानवीय संवेदना और समानता एक सपना बना रहा। परसाई ने अपनी दृष्टि समकालीन जीवन की ठोस यथार्थ की तरफ चलाई। उन्होंने समकालीन आदमी की रोजमर्रा तकलीफ को निकट से देखा और अपने परिवेश की विसंगतियों तथा व्यवस्था के बीच आम आदमी के प्रति षड़यंत्र को सही रूप पाठकों तक पहुचायाँ।

परसाई ने एक प्रतिबद्ध रचनाकार की तरह अपने देश में निरंतर बढ़ते हुए भ्रष्टाचार, पाखंड, अन्याय और विसंगतियों को खुली आँखों से देखा तथा अनुभव किया। उन्होंने अपने अनुभवों का अध्ययन, अनुशीलन और विश्लेषण किया, वस्तुपरकता के साथ वे उनकी तह में गये और अपनी रचनाओं का उद्देश्य और एक स्वस्थ दृष्टि की स्थापना की। कहा जाता है कि स्वतंत्रता के बाद के भारत को अगर जानना हो तो परसाई को पढ़िए। प्रस्तुत पुस्तक परसाई की रचनाओं के बहाने इसी स्वतंत्र भारत को जानने का प्रयास है ।

Author: Abdul Lateef
SKU: ISBN: 978-81-939315-4-7 Category: Product ID: 260

Description

प्रस्तुत पुस्तक ज्ञानरंजन द्वारा संपादित हरिशंकर परसाई की प्रतिनिधि रचनाओं का संचयन ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ व्यंग्य-संग्रह पर आधारित है। भारत की आजादी के बाद मानवीय संवेदना और समानता एक सपना बना रहा। परसाई ने अपनी दृष्टि समकालीन जीवन की ठोस यथार्थ की तरफ चलाई। उन्होंने समकालीन आदमी की रोजमर्रा तकलीफ को निकट से देखा और अपने परिवेश की विसंगतियों तथा व्यवस्था के बीच आम आदमी के प्रति षड़यंत्र को सही रूप पाठकों तक पहुचायाँ।

परसाई ने एक प्रतिबद्ध रचनाकार की तरह अपने देश में निरंतर बढ़ते हुए भ्रष्टाचार, पाखंड, अन्याय और विसंगतियों को खुली आँखों से देखा तथा अनुभव किया। उन्होंने अपने अनुभवों का अध्ययन, अनुशीलन और विश्लेषण किया, वस्तुपरकता के साथ वे उनकी तह में गये और अपनी रचनाओं का उद्देश्य और एक स्वस्थ दृष्टि की स्थापना की। कहा जाता है कि स्वतंत्रता के बाद के भारत को अगर जानना हो तो परसाई को पढ़िए। प्रस्तुत पुस्तक परसाई की रचनाओं के बहाने इसी स्वतंत्र भारत को जानने का प्रयास है ।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “हरिशंकर परसाई के व्यंग्य में यथार्थबोध”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I accept the Privacy Policy