दिल्ली के प्रवासी बिहारी दलितों की प्रस्थितिः एक समाजशास्त्रीय अध्ययन

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दिल्ली के प्रवासी बिहारी दलितों की प्रस्थितिः एक समाजशास्त्रीय अध्ययन:

यह पुस्तक शोध कार्यों के उपरांत इकट्ठे किए गए आंकड़ों साक्षात्कार अनुसूची अवलोकन समूह के साथ वार्ता के आधार पर लिखी गई है। आंतरिक प्रवचन और प्रवासी बिहारी दलितों की उपस्थिति के विषय में लिखी गई है यह पुस्तक कुल 7 अध्यायों में पुस्तक को विभक्त किया गया है। जिसमें कई प्रश्नों के उत्तर ढूंढने की कोशिश की गई है।

आंतरिक प्रवचन और अंतरराष्ट्रीय प्रवचन दोनों विषय के बारे में पुस्तक में वर्णन किया गया है। शोधार्थी और आम आदमी दोनों के लिए ज्ञान प्राप्त करने में सहयोग करेगी संक्षेप में अगर पुस्तक का सारांश देखा जाए तो पता चलता है कि बिहारी दलितों का शहर में आने के बाद आते की स्थिति सुधरी है परंतु समाज के साथ पूर्ण रूप से आत्मसात नहीं किया गया है।

गांव के बंद संरचना को छोड़कर खुले संरचना में दलित प्रवासी के लिए अवसर जरूर मिले हैं। परंतु फिर भी प्रवासियों में हुनर की कमी शिक्षा के कर्मी शोषण उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है। इसको पढ़ने के बाद यह मालूम होता है कि इस पुस्तक में अंतर प्रवचन से संबंधित अनेक नए तथ्य सामने आए हैं। इसलिए यह प्रस्तुत पुस्तक आगामी दिनों के लिए काम करेगी।

SKU: ISBN: 978-81-939315-1-6 Categories: , , , Tags: , Product ID: 268

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