‘एकेडमिक जगत’ (Academic Jagat)  शीर्षक पत्रिका अब प्रकाशित

पिछले एक साल की कड़ी मेहनत के बाद हमें यह अनुमति मिली है कि ‘एकेडमिक जगत’ (Academic Jagat)  शीर्षक पत्रिका अब प्रकाशित की जा सकती है। ऐकडेमिक जगत, इसके संस्थापक जाहिदुल दीवान जी का एक सपना है कि अकादमिक दुनिया में एक ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए जहाँ हर विधा के लोग एक साथ अपने उद्देश्य के लिए काम कर सकें।

इसी दूरदृष्टि के साथ ऐकडेमिक जगत की टीम ने प्रस्तुत द्विभाषिक पत्रिका के लिए काम करने की सहमति जताई थी। यह पहला अंक है और अभी से उद्देश्य के प्रति पूर्ण समर्पण दिखाई पड़ रहा है। इस अंक के लेखकों में साहित्य क्षेत्र से बाहर के भी लोग हैं। पत्रिका का अंक तैयार करते हुए इस बात का भी ख्याल रखा गया है कि हिंदी एवं अंग्रेजी की रचनाओं की मात्रा बराबर हों।

हिंदी एवं अंग्रेजी की रचनाओं को अलग अलग इकाई भी दी गई है इसलिए विषयवस्तु की दृष्टि से थोड़ी छूट भी मिली है। किसी एक विषयवस्तु के आधार पर अंक तैयार करना जटिल काम है। इस पत्रिका को शुरू करने में अनेक लोगों का साथ मिलता रहा है।

पहली योजना तैयार होने से लेकर वर्तमान अवस्था तक अनेक उतार-चढ़ाव आएं लेकिन हम कहीं रुके नहीं। हर हाल में इस पत्रिका को निर्धारित समय पर प्रकाशित करना ही था। आर.एन.आई. ऑफिस से लेकर पुलिस थाने तक, प्रिंटिंग प्रेस से लेकर किराए के ऑफिस तक कई स्तर के संघर्ष के बाद यह पत्रिका वर्तमान स्वरूप तक पहुँची है। संपादक मंडली में कई लोग शुरू में शामिल हुए थे लेकिन उन्हें संघर्ष मंजूर नहीं था इसलिए छोड़कर चले गएं।

परंतु कुछ लोग शुरू से ही इसमें लगे रहें जिसमें सर्वश्रेष्ठ नाम प्रियंका कुमारी का है। पत्रिका की योजना बनाने से लेकर इसके लिए कार्यालय मुहैया कराने तक हर जगह उन्होंने साथ दिया और इस योजना को अंजाम तक पहुँचाया।

संपादक मंडली के दूसरे सदस्य संध्या तिवारी, रेखा दुग्गल, गीता शर्मा, पुष्पा कुमारी, शकीला अंसारी, कीर्ति बैद आदि सभी ने अपने अपने स्तर पर सहयोग दिया। प्रिंटिंग प्रेस की अनुमति किसी पत्रिका प्रकाशन के लिए सबसे बड़ा मुद्दा होता है। इसके लिए हमें भी कई जगह भटकना पड़ा। लेकिन आखिर में हमें हरि खन्ना सर का सहयोग मिला और उन्होंने हमें उनके प्रेस इंटरग्राफिक रिप्रोडक्शन से ऐकडेमिक जगत पत्रिका छापने की सहमति दी।

अब यह पत्रिका तैयार होकर आर.एन.आई. नंबर के लिए जा रही है। इस मौके पर मैं केवल इतना ही कहना चाहूँगा कि इस पत्रिका के नियमित रूप से प्रकाशित होने पर स्कूल, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय के स्तर के विद्यार्थी बहुत लाभान्वित होंगे। दरअसल यह पत्रिका विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों  के लिए ही निकाली जा रही है। सर्वप्रथम भारत के सभी शैक्षणिक संस्थानों को आपस में जोड़ना इस पत्रिका का मुख्य लक्ष्य है।

आगे इस योजना को और बढ़ावा देने की उम्मीद है। अंत में आप सभी सुदीजनों से यह निवेदन अवश्य करना चाहूँगा कि इस पत्रिका को पढ़ें और पढ़कर आपको जो महसूस होता है उसे हमसे साझा करें। आपके सुझाव मिलने के बाद पत्रिका में जो भी कमी होगी उसे दूर करने में हमें मदद मिलेगी। जल्दी ही आपसे अगले अंक में फिर मिलने के वादे के साथ…

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